#हरिशंकर_परसाई
*******
( 22अगस्त 2026 ,हरिशंकरपरसाई 103 वा जन्मदिन )
वे मेरे बचपन के दिन थे । अखबार पढ़ने की शुरुआत के दिन । ' सुनो भाई साधौ ' स्तंभ में जबलपुर के अखबारों में श्री हरिशंकर परसाई जी को बहुत पढ़ा । व्यंग्य विधा या यूँ कहिये साहित्य से परिचित हुआ । बहुत बाद में जाना कि हरिशंकर परसाई होने के मायने क्या हैं । उन्हें हमारे युग का कबीर कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी । वही सीधे सरल शब्दों में खरी और सही बात कहना । वक्त को अभिव्यक्त करना । अपने लिखे की कीमत भी चुकाना पड़ी तो चुकाई ।और फिर लिखा भी व्यंग्य के खतरे । हिन्दी साहित्य में व्यंग्य को विधा के रुप में स्थापित करने का ऐतिहासिक कार्य हरिशंकर परसाई जी ने किया । वे अक्खड़ भी थे और उदार भी । हिन्दी व्यंग्य क्षेत्र में परसाई तो सिरमौर थे । उनके बाद शरद जोशी बहुत लोकप्रिय थे । हिन्दी साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश ने शरद जोशी जी की स्मृति में सम्मान घोषित किया । पहले सम्मान के लिए श्री हरिशंकर परसाई को चुना गया । लोगों को आशंका थी कि क्या परसाई जी जोशी जी के नाम का सम्मान स्वीकार करेंगे ? पर परसाई जी ने यह सम्मान सहर्ष स्वीकार किया और शरद जोशी जी को शिद्दत से याद किया ।
और जब परसाई जी से मिला तो वह लम्हें भी हमेशा के लिए यादगार बन गये । जबलपुर में नैपियर टाउन, होम साइंस कालेज के पास परसाई जी का निवास था और उन्हीं के घर के पास मेरे मित्र बलराम पटेल और उनका परिवार रहता था । बलराम तो बचपन से ही परसाई जी को जानते रहे उनकी गली में खेलते कूदते बड़े हुए थे । थोड़ी और दूरी पर रहते थे, हमारे अग्रज मित्र आदरणीय राजबहादुर सिंह जी ( पूर्व विधायक, नोहटा) उस दिन जबलपुर प्रवास के दौरान रज्जू भैया से मिलने गया तो बोले तुम्हे भी तो परसाई जी से मिलना था ।चलो मैं वहीं जा रहा हूँ । फिर रज्जू भैया, बलराम जी और मैं परसाई जी के निवास पहुंच गये ।उस दिन वे कुछ अस्वस्थ थे ।पर श्री हनुमान वर्मा , मायाराम सुरजन जी और कुछ अन्य लोगों के संदर्भ से कुछ बातें हुई । तय हुआ कि कुछ दिन बाद वीडियो ग्राफर के साथ आऊंगा और परसाई जी से बातचीत रिकार्ड करूँगा। पर यह अवसर आया नहीं या यूँ कहें कि मेरे नसीब में यह बड़ा साक्षात्कार लेना नहीं था । पर उस एक मुलाकात की स्मृति स्थायी हो गयी ।
आम आदमी के लिए लेखन कैसे किया जाता है और अपने लिखे को कैसे जिया जाता है। मुंशी प्रेमचंद के बाद परसाई इसके श्रेष्ठ उदाहरण हैं । आज परसाई जी का 103 वा जन्म दिन है ।
#हरिशंकरपरसाई जी का पुण्य स्मरण । सादर नमन । विनत श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ । वे अपने कालजयी लेखन से हमेशा याद किये जायेंगे ।
- नरेन्द्र दुबे
#NarendraDubey
✍️ लेखक के बारे में (About the Author)
मध्य प्रदेश निवासी नरेंद्र दुबे स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक़ हैं |
1982 सें स्वतंत्र पत्रकारिता |
1985 मे राष्ट्रीय दैनिक जनसत्ता (दिल्ली) से बतौर संवाददाता सम्बद्ध हुए |
दो दशक तक जनसत्ता के लिए लेखन |
देश की विभिन्न पत्र पत्रिकाओ मे रिपोर्ताज और फीचर प्रकाशित|
विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय में अतिथि वक्ता बुंदेलखंड अंचल में सरकारी एवं गेर सरकारी स्तर पर सामाजिक कार्यों से प्रतिबद्धता पर्यावरण वाहिनी रोगी कल्याण समिति समिति हिंद मजदूर किसान पंचायत जल बिरादरी और पंचायत राज पदाधिकारी के प्रशिक्षण से सम्बद्धता |
पिछले चार दशक से साहित्यिक संगठनों से सम्बद्धता कविता, लेख, निबंध एवं समीक्षा विधा मे सतत लेखन |
हिंदुस्तानी साहित्य अकादमी द्वारा श्रेष्ठ समीक्षक़ का सम्मान
संप्रति - स्वतंत्र लेखन एवं प्रबोधन
हरिशंकर परसाई ज़ी विचारों से वे वामपंथी थे, लेकिन जब वे सामाजिक-राजनीतिक विसंगतियों पर लिखते थे, तो किसी को नहीं छोड़ते थे। चाहे वे कांग्रेसी हों, समाजवादी हों, गांधीवादी या कम्युनिस्ट हों। उन्होंने सभी पर तीखे प्रहार किए है। आपके द्वारा परेसाईं ज़ी पर लिखा गया ल्व्की हमेशा याद राजहंस जायेगा.
जवाब देंहटाएं