युग तुलसी पूज्य पंडित रामकिंकर जी उपाध्याय : पुण्य स्मरण

Narendra Dubey
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युग तुलसी पूज्य पंडित  रामकिंकर जी उपाध्याय : पुण्य स्मरण 
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भगवान श्री राम और रामचरित मानस हमेशा ही मानस में रहते हैं ।और श्री राम और रामचरित मानस के साथ पूज्य पंडित रामकिंकर उपाध्याय जी की स्मृति भी सदा जीवंत रहती है । महाराज श्री से सुनी कथा ने मेरे मन मस्तिष्क पर स्थायी प्रभाव छोड़ा है । उन्हें युग तुलसी के रुप में समादृत किया जाता है और यह उपाधि उन पर एकदम  सार्थक है । संत विद्वान तो यहाँ तक कहते हैं कि खुद गोस्वामी तुलसीदास जी भी यदि अपनी लिखी रामचरितमानस मानस की ऐसी व्याख्या और मीमांसा सुनते तो गदगद और अभिभूत हो जाते । भक्ति ,वेदांत ,सहजता, सरलता और अप्रतिम विद्वत्ता की मंगल मूर्ति थे पूज्य रामकिंकर जी उपाध्याय । मैं तो उन्हें ' महाराज श्री ' के संबोधन से ही मित्रो के बीच चर्चा करता था ।पर पूज्य श्रवणानंद सरस्वती जी महाराज अपनी भागवत कथाओं में जब पूज्य रामकिंकर जी उपाध्याय को उद्धृत करते हैं तो आदर और श्रद्धा से ' पूज्य पंडित जी ' कहते हैं । स्वामी जी का यह संबोधन मुझे भी अच्छा लगता है । 
सौभाग्यशाली हूँ पूज्य पंडित जी महाराज के मुखारविंद से रामकथा भी सुनी ।उनसे संवाद करने और उनका साक्षात्कार लेने का अवसर मिला । रामकथा की जैसी दार्शनिक, तात्विक और सम्यक व्याख्या श्री रामकिंकर जी करते थे, अद्भुत है । उनका लिखा साहित्य हमेशा मार्गदर्शन करता रहेगा और प्रेरणा देगा । रामचरित मानस के सूत्रों को समझने और गहराई से जानने में पंडित जी के प्रवचन सहायक होते हैं । 
9 अगस्त 2002 को पूज्यपाद #पंडित_रामकिंकर_उपाध्याय  जी ब्रह्मलीन हुए थे ।
महाराज श्री की पावन  स्मृति को शत शत नमन । 
- नरेन्द्र दुबे
#NarendraDubey 
पुनश्च- सौभाग्यशाली हूँ पूज्य पंडित जी के आटोग्राफ आशीर्वाद भी पाया ।

✍️ लेखक के बारे में (About the Author)

मध्य प्रदेश निवासी नरेंद्र दुबे स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक़ हैं | 1982 सें स्वतंत्र पत्रकारिता | 1985 मे राष्ट्रीय दैनिक जनसत्ता (दिल्ली) से बतौर संवाददाता सम्बद्ध हुए | दो दशक तक जनसत्ता के लिए लेखन | देश की विभिन्न पत्र पत्रिकाओ मे रिपोर्ताज और फीचर प्रकाशित| विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय में अतिथि वक्ता बुंदेलखंड अंचल में सरकारी एवं गेर सरकारी स्तर पर सामाजिक कार्यों से प्रतिबद्धता पर्यावरण वाहिनी रोगी कल्याण समिति समिति हिंद मजदूर किसान पंचायत जल बिरादरी और पंचायत राज पदाधिकारी के प्रशिक्षण से सम्बद्धता | पिछले चार दशक से साहित्यिक संगठनों से सम्बद्धता कविता, लेख, निबंध एवं समीक्षा विधा मे सतत लेखन | हिंदुस्तानी साहित्य अकादमी द्वारा श्रेष्ठ समीक्षक़ का सम्मान संप्रति - स्वतंत्र लेखन एवं प्रबोधन

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