कवि दिनकर सोनवलकर

Narendra Dubey
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   दिनकर सोनवलकर 
दमोह की माटी के लाल , पुरानी पीढ़ी के यशस्वी हस्ताक्षर आदरणीय दिनकर सोनवलकर जी तो अब स्मृति शेष हैं । पर उनके समकालीन लोगों और उनके मित्रो से दिनकर जी के व्यक्तित्व के किस्से सुने हैं । मुझे भी दो एक अवसर पर दिनकर जी से मिलने और उनका गायन सुनने का अवसर मिला । उनके मित्र शरद श्रीवास्तव जी के निवास पर उनका हारमोनियम पर स्वर लगाते हुए चेहरा आज भी ज़ेहन में है । 
#दिनकर_सोनवलकर जी उस दौर में कवि के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर समादृत थे ।याद आता है दशकों पहले श्री दिनकर सोनवलकर, श्री सत्यमोहन वर्मा और श्री विट्ठलभाई पटेल की कविताओं का समवेत संग्रह - ' दीवारों के खिलाफ़ ' प्रकाशित हुआ था । याद हो कि दिनकर जी ने  महाविद्यालयीन शिक्षा विभाग में आने से पहले दमोह के जैन स्कूल में अध्यापन भी किया था । महाविद्यालयीन शिक्षा में आने के बाद मालवा का जावरा और रतलाम उनका ठौर बना । मराठी मातृभाषी बुन्देलखण्ड के लाल ने मालव भूमि में भी अपनी विशेष पहचान कायम की । हिन्दी की बहुत सेवा की । साहित्य, संगीत और दर्शन से समृद्ध उनका व्यक्तित्व आदर पाता रहा ।
प्रिय आशीष सोनवलकर ने याद दिलाया कि आज दिनकर चाचा जी का जन्म दिन रहता है । 
आदरणीय कवि दिनकर सोनवलकर जी की स्मृति को सादर नमन करता हूँ । #दमोह आप पर नाज करता है ।🙏🙏
#NarendraDubey 

✍️ लेखक के बारे में (About the Author)

मध्य प्रदेश निवासी नरेंद्र दुबे स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक़ हैं | 1982 सें स्वतंत्र पत्रकारिता | 1985 मे राष्ट्रीय दैनिक जनसत्ता (दिल्ली) से बतौर संवाददाता सम्बद्ध हुए | दो दशक तक जनसत्ता के लिए लेखन | देश की विभिन्न पत्र पत्रिकाओ मे रिपोर्ताज और फीचर प्रकाशित| विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय में अतिथि वक्ता बुंदेलखंड अंचल में सरकारी एवं गेर सरकारी स्तर पर सामाजिक कार्यों से प्रतिबद्धता पर्यावरण वाहिनी रोगी कल्याण समिति समिति हिंद मजदूर किसान पंचायत जल बिरादरी और पंचायत राज पदाधिकारी के प्रशिक्षण से सम्बद्धता | पिछले चार दशक से साहित्यिक संगठनों से सम्बद्धता कविता, लेख, निबंध एवं समीक्षा विधा मे सतत लेखन | हिंदुस्तानी साहित्य अकादमी द्वारा श्रेष्ठ समीक्षक़ का सम्मान संप्रति - स्वतंत्र लेखन एवं प्रबोधन

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