गीतकार विट्ठलभाई पटेल

Narendra Dubey
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 आदरणीय विट्ठल भाई पटेल तो अब स्मृति शेष हैं ,  पर उनकी अनगिनत यादें हमारे साथ हैं । उनके जन्मदिन पर सागर में उनके दोस्तों और शुभचिंतकों का जमावड़ा होता था । साहित्य संगीत की महफिल जमती थीं ।कभी किसी किताब का विमोचन होता था । ऐसे ही एक समारोह में आदरणीय सत्यमोहन वर्मा जी के साथ जितेन्द्र हेनरी जी और मेरा जाना हुआ । उस कार्यक्रम में जाने माने फिल्म समीक्षक ,लेखक श्री जय प्रकाश चौकसे एवं ब्लिट्ज अखबार के मशहूर पत्रकार नंदकिशोर नौटियाल जी से भेंट हुई । चौकसे जी और विट्ठल भाई जी  विश्वविद्यालय में वर्मा जी के सहपाठी थे ।अतः उनका वह मित्रता भाव आजीवन रहा । अफसोस चौकसे जी और विट्ठल भाई पटेल जी अब स्मृति शेष हैं । 
 विट्ठल भाई पटेल जी बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे । वे उद्योगपति थे । धर्म अध्यात्म की चेतना से संपन्न थे और नैष्ठिक रूप से धर्म और परंपराओं को मानते थे । धर्म परंपराओं के संस्कार उन्हें अपने पिता लल्लूभाई पटेल एवं माता जी से मिले थे । विट्ठल भाई राजनेता थे ।मप्र शासन में मंत्री रहे । सिने संसार से उनका निकट संबंध रहा । वे खुद अपने अंचल में हीरो की मानिंद थे । राष्ट्रीय स्तर पर कार रैली में हिस्सेदारी करते थे । अनेक फिल्मों में गीत लिखे । खूब प्रसिद्धि मिली बाॅबी फिल्म के मशहूर गीत- " झूठ बोले कऊआ काटे " से । " न मांगू सोना चांदी, न मांगू हीरा मोती ' गीत भी विट्ठलभाई का लिखा है । फिल्म अभिनेता राजकपूर तो उनके मित्र थे ।साथ ही पूरे कपूर खानदान से उनके संबंध थे । एक समय था जब विट्ठल भाई पटेल के सागर स्थित राधेश्याम भवन में फिल्मी सितारों की आवाजाही रहती थी । फिल्म ' तीसरी कसम ' की शूटिंग भी विट्ठलभाई जी के सौजन्य से बुन्देलखण्ड अंचल में हुई थी । और टीम का ठहराव राधेश्याम भवन में । जीवन के अंतिम दो दशक उन्होंने पूर्णतः गांधीवाद के माध्यम से समाज सेवा को समर्पित किये थे । उनके द्वारा चलाये गये स्वच्छता अभियानों में भी सहभागिता का अवसर मिला था । विट्ठलभाई पटेल जी से हुई अनेक मुलाकातें और सहभोज की स्मृतियाँ मानस में रहती हैं । पथरिया के प्रसिद्ध संत ब्रह्मलीन राधेश्याम जी महाराज का परम अनुग्रह विट्ठलभाई जी और उनके परिवार पर रहता था । भूपू मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ल जी और भूपू केन्द्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल जी से उनका पारिवारिक जुड़ाव रहा । वह पीढ़ी और वे बातें अब स्मृतियों में अमानत की तरह हैं ।
जन्म दिन पर हमारे प्रिय गीतकार और राजनेता विट्ठल भाई पटेल जी का पुण्य स्मरण । नमन । 
- नरेन्द्र दुबे 
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✍️ लेखक के बारे में (About the Author)

मध्य प्रदेश निवासी नरेंद्र दुबे स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक़ हैं | 1982 सें स्वतंत्र पत्रकारिता | 1985 मे राष्ट्रीय दैनिक जनसत्ता (दिल्ली) से बतौर संवाददाता सम्बद्ध हुए | दो दशक तक जनसत्ता के लिए लेखन | देश की विभिन्न पत्र पत्रिकाओ मे रिपोर्ताज और फीचर प्रकाशित| विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय में अतिथि वक्ता बुंदेलखंड अंचल में सरकारी एवं गेर सरकारी स्तर पर सामाजिक कार्यों से प्रतिबद्धता पर्यावरण वाहिनी रोगी कल्याण समिति समिति हिंद मजदूर किसान पंचायत जल बिरादरी और पंचायत राज पदाधिकारी के प्रशिक्षण से सम्बद्धता | पिछले चार दशक से साहित्यिक संगठनों से सम्बद्धता कविता, लेख, निबंध एवं समीक्षा विधा मे सतत लेखन | हिंदुस्तानी साहित्य अकादमी द्वारा श्रेष्ठ समीक्षक़ का सम्मान संप्रति - स्वतंत्र लेखन एवं प्रबोधन

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