भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगाँठ : स्मरण

Narendra Dubey
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कुछ याद इन्हें भी कर लो !
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 आज के दिन यानी 9अगस्त को 1942 में  महात्मा गांधी द्वारा "अंग्रेजो भारत छोड़ो " आंदोलन शुरू हुआ था। बापू ने आन्दोलन को निर्णायक बनाते हुए नारा दिया था- " करो या मरो " । भारत छोड़ो आंदोलन में दमोह जिले के सेनानियों की सक्रिय भागीदारी थी। शहर गांव सभी जगह से आन्दोलन को सहयोग मिल रहा था ।
आज़ादी के बहुत - बहुत बाद पैदा हुआ, पर सौभाग्यशाली हूँ उस स्वतंत्रता आंदोलन के बहुत से वीरों से मिलने और आंदोलन के संस्मरण सुनने का अवसर मिला था। जो मेरी निधि हैं।
स्मृति शेष श्री कुंजबिहारी लाल जी गुरु, श्री महादेव प्रसाद जी गुप्ता , भूतपूर्व सांसद श्री प्रभुनारायण जी टंडन , श्री ज्ञानचंद श्रीवास्तव जी , श्री रतनचंद सिंघई जी , श्री रूपचंद बजाज जी ,श्री पूरन लाल जी जैन , जगमोहन लाल श्रीवास्तव,  दादा खेमचंद्र बजाज जी का पुण्य स्मरण जिनका स्नेह आशीष मुझे मिला और उनके जीवन अनुभव सुनने मिले। 
अग्रणी सेनानी स्वर्गीय रघुवर प्रसाद जी मोदी से तो कभी प्रत्यक्ष मेरा साक्षात्कार नहीं हुआ। पर कालांतर में उनके परिवार का हिस्सा बना और उनके परिवारजनों से उस कालखंड के बहुत किस्से सुने। भूतपूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय श्यामाचरण शुक्ल जी खुद भी सेनानी थे और उनके पूज्य पिता जी पं रविशंकर शुक्ल प्रदेश के अग्रणी सैनानी थे, साथ ही उनके तीन बड़े भाई श्री भगवती चरण, श्री अंबिका चरण और डाॅ ईश्वरी चरण शुक्ल भी स्वतंत्रता संग्राम में सहभागी होकर जेल गये थे । आदरणीय श्यामाचरण शुक्ल जी से बहुत संस्मरण सुनने मिले। दमोह के बड़े सैनानी रहे श्री प्रेमशंकर धगट जी के परिजनों से भी संबंध रहा और धगट जी के योगदान से परिचित हुआ । हटा के श्री चंद्रशेखर त्रिवेदी चंदा भैया के भतीजे डाॅ संजय त्रिवेदी से उनके ताऊ जी की तेजस्विता और स्वतंत्रता संग्राम में संलग्नता के किस्से सुने ।
सभी स्वातन्त्र वीरों को श्रद्धा नमन। 
- नरेंद्र दुबे 
#NarendraDubey 
#भारतछोड़ोआन्दोलन 

✍️ लेखक के बारे में (About the Author)

मध्य प्रदेश निवासी नरेंद्र दुबे स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक़ हैं | 1982 सें स्वतंत्र पत्रकारिता | 1985 मे राष्ट्रीय दैनिक जनसत्ता (दिल्ली) से बतौर संवाददाता सम्बद्ध हुए | दो दशक तक जनसत्ता के लिए लेखन | देश की विभिन्न पत्र पत्रिकाओ मे रिपोर्ताज और फीचर प्रकाशित| विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय में अतिथि वक्ता बुंदेलखंड अंचल में सरकारी एवं गेर सरकारी स्तर पर सामाजिक कार्यों से प्रतिबद्धता पर्यावरण वाहिनी रोगी कल्याण समिति समिति हिंद मजदूर किसान पंचायत जल बिरादरी और पंचायत राज पदाधिकारी के प्रशिक्षण से सम्बद्धता | पिछले चार दशक से साहित्यिक संगठनों से सम्बद्धता कविता, लेख, निबंध एवं समीक्षा विधा मे सतत लेखन | हिंदुस्तानी साहित्य अकादमी द्वारा श्रेष्ठ समीक्षक़ का सम्मान संप्रति - स्वतंत्र लेखन एवं प्रबोधन

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