बीती सदी के चाणक्य : पंडित द्वारका प्रसाद मिश्र

Narendra Dubey
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पं द्वारका प्रसाद मिश्र : 125 वी जयंती 
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आजादी के आन्दोलन में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाले राजनेता, प्रखर पत्रकार, यशस्वी साहित्यकार, शिक्षाविद और मध्यप्रदेश के भूतपूर्व  मुख्यमंत्री पं. #द्वारका_प्रसाद_मिश्र जी की 125 वी जयंती पर उनकी पुण्य स्मृति को सादर नमन ।
    राजनीति के चाणक्य के रुप में समादृत मप्र के भूपू मुख्यमंत्री पं. #द्वारका_प्रसाद_मिश्र विद्वान और दृढ़ निश्चयी राजनेता थे। संपादक और पत्रकार के रूप में राष्ट्रीय जागरण का कार्य किया । 'कृष्णायन ' जैसा महाकाव्य रचा तो कुलपति रहते हुए सागर विश्वविद्यालय को संवारा।  स्वतंत्रता संग्राम में 4 बार जेल यात्रा कर कुल  7 वर्ष का कारावास भोगा। और जिद्दी ऐसे थे कि छोटा सा समझौता करना गवारा नहीं किया और कांग्रेस की तत्कालीन नेता राजमाता विजया राजे सिंधिया को नाराज कर दिया । नतीजतन श्रीमती सिंधिया ने कांग्रेस से विद्रोह कर मिश्र जी की  सरकार गिरवा दी और मिश्र मंत्रीमंडल के मंत्री रहे श्री गोविंद नारायण सिंह के नेतृत्व में संविद सरकार बनवा दी थी । यद्यपि संविद सरकार की उम्र ज्यादा नहीं रही ।संविद सरकार  गिरी तो मिश्र सरकार में ही मंत्री रहे पं श्यामाचरण शुक्ल के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार बनी । 
गौरतलब है कि नये मध्यप्रदेश के गठन से पहले सी पी एंड बरार प्रदेश में वह पंडित रविशंकर शुक्ल मंत्री मंडल में महत्त्वपूर्ण विभागों के केबीनेट मंत्री रहे । किसी बात पर तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से मतभेद के चलते उन्हें कांग्रेस पार्टी से बाहर भी होना पड़ा । अपने राजनीतिक निर्वासन के दौरान वे शिक्षा ,समाजसेवा और साहित्य सृजन क्षेत्र में रत रहे । सागर विश्वविद्यालय के कुलपति रहे । बाद में वह कांग्रेस पार्टी में लौटे । थोड़े समय बाद मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने । कहा जाता है कि श्री लालबहादुर शास्त्री जी के देहावसान के बाद श्रीमती इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री बनवाने में पंडित द्वारका प्रसाद मिश्र जी की प्रमुख भूमिका थी । इंदिरा जी उनके प्रति कृतज्ञ रहीं । मध्यप्रदेश में जब राज्य सचिवालय का भवन बना तो मिश्र जी ने उसका नामकरण अपने प्रिय नेता सरदार वल्लभभाई पटेल जी की स्मृति को समर्पित किया था ।
मिश्र जी को लेकर कितने किस्से हैं जो पुराने नेताओं की जुबान पर रहते थे । दिग्गज राजनेता और मध्यप्रदेश के भूपू मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह जी मिश्र जी के सबसे प्रिय थे । अर्जुन सिंह जी, मिश्रा जी को अपना राजनीतिक गुरु मानते थे ।
राजनीति के महारथी पंडित द्वारका प्रसाद मिश्र जी की प्रतिमा उनकी कर्म स्थली जबलपुर में स्थापित है जो उनकी कीर्ति का स्मरण दिलाती है ।
- नरेन्द्र दुबे 
#NarendraDubey 
 #dwarkaprasadmishra

✍️ लेखक के बारे में (About the Author)

मध्य प्रदेश निवासी नरेंद्र दुबे स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक़ हैं | 1982 सें स्वतंत्र पत्रकारिता | 1985 मे राष्ट्रीय दैनिक जनसत्ता (दिल्ली) से बतौर संवाददाता सम्बद्ध हुए | दो दशक तक जनसत्ता के लिए लेखन | देश की विभिन्न पत्र पत्रिकाओ मे रिपोर्ताज और फीचर प्रकाशित| विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय में अतिथि वक्ता बुंदेलखंड अंचल में सरकारी एवं गेर सरकारी स्तर पर सामाजिक कार्यों से प्रतिबद्धता पर्यावरण वाहिनी रोगी कल्याण समिति समिति हिंद मजदूर किसान पंचायत जल बिरादरी और पंचायत राज पदाधिकारी के प्रशिक्षण से सम्बद्धता | पिछले चार दशक से साहित्यिक संगठनों से सम्बद्धता कविता, लेख, निबंध एवं समीक्षा विधा मे सतत लेखन | हिंदुस्तानी साहित्य अकादमी द्वारा श्रेष्ठ समीक्षक़ का सम्मान संप्रति - स्वतंत्र लेखन एवं प्रबोधन

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