"सेम की तरकारी और साढ़ू भाई की रिश्तेदारी, बन पाये तो कईए का "
हमारे मित्र और बुन्देली के कवि रमेश तिवारी बात बात में गज़ब कहावतें और अहाने कह जात हैं। कल पंडित नीलमणी दीक्षित जी के ठिकाने पर बतकाव लगो तो । चर्चा सेम की स्वादिष्ट सब्जी की चली सो तिवारी जी ने झट से जा कहावत कह डारी । फिर कहन लगे हमाई तो हमाये साढ़ू भाईयों से खूब पटत है । और हम खुद सेम की सब्जी अच्छी बनात हैं । बातों को लब्बोलुआब जो हतो के सेम की स्वादिष्ट सब्जी बनाबो सबके बस में नई रैत और ऐसई साढ़ू भाईयों के रिश्ते में बहुत कम लोगों में मधुरता होत । पर चर्चा में चर्चा चली सो कहावत को विस्तार भओ हरि मिश्रा जी ने कछु और बात जोड़ी। रघु जी तो एक और कहावत कहत हैं - " साढ़ू भाई सो सगा भाई बाकी सब सटर - पटर " । बातें तो खूब होत हंसी मजाक में ।अपन खों जा कहावत अच्छी लगी सो सोची सबई दोस्तों तक पहुंचा दई जाये ।
जै राम जी...
- नरेन्द्र दुबे
✍️ लेखक के बारे में (About the Author)
मध्य प्रदेश निवासी नरेंद्र दुबे स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक़ हैं | 1982 सें स्वतंत्र पत्रकारिता | 1985 मे राष्ट्रीय दैनिक जनसत्ता (दिल्ली) से बतौर संवाददाता सम्बद्ध हुए | दो दशक तक जनसत्ता के लिए लेखन | देश की विभिन्न पत्र पत्रिकाओ मे रिपोर्ताज और फीचर प्रकाशित| विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय में अतिथि वक्ता बुंदेलखंड अंचल में सरकारी एवं गेर सरकारी स्तर पर सामाजिक कार्यों से प्रतिबद्धता पर्यावरण वाहिनी रोगी कल्याण समिति समिति हिंद मजदूर किसान पंचायत जल बिरादरी और पंचायत राज पदाधिकारी के प्रशिक्षण से सम्बद्धता | पिछले चार दशक से साहित्यिक संगठनों से सम्बद्धता कविता, लेख, निबंध एवं समीक्षा विधा मे सतत लेखन | हिंदुस्तानी साहित्य अकादमी द्वारा श्रेष्ठ समीक्षक़ का सम्मान संप्रति - स्वतंत्र लेखन एवं प्रबोधन