काव्य कृति-यादों से संवाद, डा रेणु पंत

Narendra Dubey
By -
0
"यादों से संवाद - डॉ रेणु पंत "
  डॉ रेणु पंत की काव्य कृति "यादों से संवाद "  मेरे सामने है। बेहतरीन कविताओं के संग्रह का नाम है -"यादों से संवाद " . कविता में जब जिंदगी आती है तो रचनाकार के भीतर का रचाव और परिवेश सहज ही रूपायित होता है। प्रेम भावनाओं,मानवीय रिश्तों और प्रकृति के विभिन्न आयामों को रेणु जी ने सहज और सुन्दर तरीके से अभिव्यक्त किया है। "तुम नहीं /तुम्हारी याद रहती है पास / और यादों से होता है /निरंतर संवाद / ". 
    रेणु की यह कहन दिल को गहरे छूती है -"कितना भी बदले वक्त /बदले मौसम / रिश्ते-नाते बदले /मीत तुम न बदलना /" .
        प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ बुद्धिनाथ मिश्र  ने पुस्तक की भूमिका में कविताओ की श्रेष्ठता पर अपनी बेबाक राय दी है। मुझे इस कृति में सबसे अच्छी बात यह लगी कि कवयित्री ने भाषा का संयम ,शालीनता और शब्द विधान का सुन्दर निर्वहन किया है। रेणु जी की यह दूसरी कृति है। प्रथम काव्य कृति 'फिर पंख लगे पहाड़ को ' २०११ मे आई थी। यह कृति सत्साहित्य प्रकाशन ,दिल्ली ने प्रकाशित की है।   
  उम्दा कृति की रचनाकार डॉ. रेणु पंत जी को बेहतर सृजन के लिए हार्दिक बधाई। सृजन पथ पर वे सदैव अग्रसर रहें और नित नए शिखर छुएँ यही मंगल कामना है। 
- नरेंद्र दुबे

✍️ लेखक के बारे में (About the Author)

मध्य प्रदेश निवासी नरेंद्र दुबे स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक़ हैं | 1982 सें स्वतंत्र पत्रकारिता | 1985 मे राष्ट्रीय दैनिक जनसत्ता (दिल्ली) से बतौर संवाददाता सम्बद्ध हुए | दो दशक तक जनसत्ता के लिए लेखन | देश की विभिन्न पत्र पत्रिकाओ मे रिपोर्ताज और फीचर प्रकाशित| विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय में अतिथि वक्ता बुंदेलखंड अंचल में सरकारी एवं गेर सरकारी स्तर पर सामाजिक कार्यों से प्रतिबद्धता पर्यावरण वाहिनी रोगी कल्याण समिति समिति हिंद मजदूर किसान पंचायत जल बिरादरी और पंचायत राज पदाधिकारी के प्रशिक्षण से सम्बद्धता | पिछले चार दशक से साहित्यिक संगठनों से सम्बद्धता कविता, लेख, निबंध एवं समीक्षा विधा मे सतत लेखन | हिंदुस्तानी साहित्य अकादमी द्वारा श्रेष्ठ समीक्षक़ का सम्मान संप्रति - स्वतंत्र लेखन एवं प्रबोधन

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)