मध्यप्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री श्री बाबूलाल गौर साहब का आज जन्मदिन रहता है । कभी मिलकर तो कभी लैंडलाइन फोन पर आपको शुभकामनाएँ और बधाई दिया करता था । अब जब गौर साहब स्मृति शेष हैं , तब भी उनकी याद आई । गौर साहब अच्छी बोली, वाणी और अपनी सदाशयी भाषा व्यवहार के लिए जाने जाते थे । आम जन में उनकी लोकप्रियता का प्रमाण यही है कि एक ही विधान सभा क्षेत्र से दशको तक लगातार 10 चुनाव जीतकर अपराजेय रहे । उनके व्यक्तित्व की विशेषता थी कि वे अपने दल से अधिक विरोधी दल के नेताओं में आदर सम्मान पाते थे । और इसके पीछे उनकी सदाशयता, विनम्रता और संस्कारित भाषा थी। पूर्व मुख्यमंत्री श्री अर्जुन सिंह जी हों या तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष श्रीयुत श्रीनिवास तिवारी जी, गौर साहब को गौर से सुनते और स्नेह सम्मान देते थे । यूँ भी सभी बड़े
-छोटे नेता , अधिकारी , आमजन गौर साहब को आदर देते और प्रेम करते थे ।
मजदूर से वकील और वकील से राजनेता और फिर मप्र के मुख्यमंत्री बनने तक का शानदार सफर तय करने वाले #बाबूलाल_गौर जी बेबाक , व्यावहारिक और सफल राजनेता थे । वे दलगत राजनीति से परे सभी के प्रिय थे। खुद गौर साहब बताते थे कि वर्ष 1998 में दोबारा दिग्विजय सिंह की सरकार बन गयी । पंडित श्रीनिवास तिवारी जी ही दोबारा विधानसभा अध्यक्ष बने । भाजपा विपक्ष में रही ।नेता प्रतिपक्ष का चुनाव होना था ।गौर साहब वरिष्ठ विधायक थे ।पर नेता प्रतिपक्ष बनने में उनकी रुचि नहीं थी । तिवारी जी ने उन्हें बुलाकर लगभग डांटते हुए परामर्श दिया था कि नेता प्रतिपक्ष का पद ठुकराना मत । इसी पद के कारण आगे जाकर मुख्यमंत्री के प्रमुख दावेदारों में रहोगे । तिवारी जी की बात सही निकली , वर्ष 2004 में थोड़े समय के लिये ही सही गौर साहब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने ।
गौर साहब से हुई मुलाकातें और बहुत से संस्मरण सहज याद आते हैं ।
वर्ष 2003 में विधान सभा चुनाव से ठीक पहले दमोह प्रवास के दौरान उन्होंने मुझे एक डायरी भेंट की थी और उस पर अपने हस्ताक्षर सहित अपना प्रिय शेर अंकित किया था- " हालात से सहमे हुए लोगो इतना समझ लीजिये/ हालात गुजर जाते हैं ठहरा नहीं करते ।"
आज गौर साहब के जन्मदिन पर उनका पुण्य स्मरण ।सादर नमन ।
- नरेन्द्र दुबे
#NarendraDubey
Krishna Gaur
#संस्मरण
✍️ लेखक के बारे में (About the Author)
मध्य प्रदेश निवासी नरेंद्र दुबे स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक़ हैं | 1982 सें स्वतंत्र पत्रकारिता | 1985 मे राष्ट्रीय दैनिक जनसत्ता (दिल्ली) से बतौर संवाददाता सम्बद्ध हुए | दो दशक तक जनसत्ता के लिए लेखन | देश की विभिन्न पत्र पत्रिकाओ मे रिपोर्ताज और फीचर प्रकाशित| विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय में अतिथि वक्ता बुंदेलखंड अंचल में सरकारी एवं गेर सरकारी स्तर पर सामाजिक कार्यों से प्रतिबद्धता पर्यावरण वाहिनी रोगी कल्याण समिति समिति हिंद मजदूर किसान पंचायत जल बिरादरी और पंचायत राज पदाधिकारी के प्रशिक्षण से सम्बद्धता | पिछले चार दशक से साहित्यिक संगठनों से सम्बद्धता कविता, लेख, निबंध एवं समीक्षा विधा मे सतत लेखन | हिंदुस्तानी साहित्य अकादमी द्वारा श्रेष्ठ समीक्षक़ का सम्मान संप्रति - स्वतंत्र लेखन एवं प्रबोधन