दद्दा जी पं. देवप्रभाकर शास्त्री

Narendra Dubey
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देव कृपा  से अलंकृत थे पंडित देवप्रभाकर जी 
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   पूज्य दद्दा जी पंडित देवप्रभाकर शास्त्री जी की 6वी  पुण्य तिथि है । उनका पुण्य स्मरण मन को भिगो जाता है । स्नेह, प्रेम, आशीष,करुणा से सराबोर कर देने वाले निर्मल व्यक्तित्व और सिद्ध संत थे , पूज्य दद्दा जी ।  यूँ भी दद्दा जी से मिला स्नेह आशीष एक अमानत की तरह स्मृति में दर्ज है । 
     धर्म सम्राट श्री श्री 108 करपात्री जी महाराज के दीक्षित शिष्य पंडित  देवप्रभाकर जी बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक थे और ज्योतिष शास्त्र के महान विद्वान । पार्थिव शिवलिंग निर्माण और ज्ञान यज्ञ आयोजन के लिए पूरे देश में उनकी ख्याति थी । दद्दा जी से श्री मद् भागवत कथा सुनने का अलग ही आनंद था । कई स्वनामधन्य हस्तियों सहित हजारों आम जन दद्दा जी के दीक्षित शिष्य थे । दद्दा जी के आश्रम  घनश्याम बाग कूड़ा गांव के आसपास पूरे अंचल के लोगों के लिए वे ' गुरु दद्दा ' थे ।
दद्दा जी आध्यात्मिक, धार्मिक दर्शन के साथ लोक व्यवहार के क्षेत्र में भी अद्भुत व्यक्तित्व  थे । वे प्रेम ,दया करुणा  और सहयोग की मूर्ति थे । व्यास पीठ और गुरु सत्ता की गरिमा और मान को कभी आंच नहीं आने दी। वाणी का संयम, शब्द आराधना और शिष्टाचार उनके स्वभाव में था ।  उन्होंने अपने शिष्य समुदाय को भी यही संस्कार दिये थे । अनेकानेक बार दद्दा जी से मिलना हुआ, सार्वजनिक और एकांतिक संवाद हुआ; पर दद्दा जी के मुख से कभी हल्की बात सुनने नहीं मिली । देश के प्रतिष्ठित राजनेताओं के साथ दद्दा जी के संवाद का साक्षी भी रहा । 
    अपने शिष्य समुदाय का वे पुत्रवत ही ध्यान रखते थे । कितने संस्मरण है दद्दा जी के सानिध्य और कृपा के । मैं दद्दा जी का दीक्षित शिष्य नहीं हूँ , पर वे मेरे लिए गुरुतुल्य ही थे ।  इस अकिंचन पर  दद्दा जी की कृपा दृष्टि रही । उनका स्नेह आशीर्वाद सदैव मिला ।
पूज्य दद्दा जी कूड़ा वालों के श्री चरणों में दंडवत प्रणाम । विनत श्रद्धाजंलि अर्पित करता हूँ ।
- नरेन्द्र दुबे 
#NarendraDubey 

✍️ लेखक के बारे में (About the Author)

मध्य प्रदेश निवासी नरेंद्र दुबे स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक़ हैं | 1982 सें स्वतंत्र पत्रकारिता | 1985 मे राष्ट्रीय दैनिक जनसत्ता (दिल्ली) से बतौर संवाददाता सम्बद्ध हुए | दो दशक तक जनसत्ता के लिए लेखन | देश की विभिन्न पत्र पत्रिकाओ मे रिपोर्ताज और फीचर प्रकाशित| विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय में अतिथि वक्ता बुंदेलखंड अंचल में सरकारी एवं गेर सरकारी स्तर पर सामाजिक कार्यों से प्रतिबद्धता पर्यावरण वाहिनी रोगी कल्याण समिति समिति हिंद मजदूर किसान पंचायत जल बिरादरी और पंचायत राज पदाधिकारी के प्रशिक्षण से सम्बद्धता | पिछले चार दशक से साहित्यिक संगठनों से सम्बद्धता कविता, लेख, निबंध एवं समीक्षा विधा मे सतत लेखन | हिंदुस्तानी साहित्य अकादमी द्वारा श्रेष्ठ समीक्षक़ का सम्मान संप्रति - स्वतंत्र लेखन एवं प्रबोधन

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