अर्थात बंदर की महारत उसकी डालियों पर उछल कूद की है। वह जिस तेजी और फुर्ती से वृक्षों पर कूद फांद कर आवाजाही करता है कोई दूसरा जीवधारी ऐसा नहीं कर पाता । पतली से पतली और ऊंचे से ऊंची डाली पर पलक झपकते पहुंच जाता है । शायद ही कभी कोई बंदर डाली पकड़ने और उस पर लटकने बैठने से चूक जाये । काश ! कभी कोई बंदर अपने इस कौशल से चूकता है तो फिर सीधे नीचे गिरता है और अधमरेपन का शिकार हो जाता है । यही हाल किसान और किसानी का है । समय रहते ग्रीष्म काल में खेतों की तैयारी और बीज आदि की खरीद या व्यवस्था हो जाती है ।जैसे ही मानसून का आगमन होता है, बतर मिलते ही बौनी आदि कर लेता है । थोड़ा भी समय चूका तो उसकी बौनी में देरी हो जाती है या अत्याधिक वर्षा से बुवाई ही प्रभावित हो जाती है ।यही हाल फसल के पकने पर कटाई के समय होता है ।फसल के माकूल पकते ही काटना पड़ती है । कुछ फसलें अधिक समय तक लगी रहने से उनकी फलियां खेत में गिर जाती हैं और किसान के हाथ कुछ नहीं आता ।
इस कहावत का संबंध हम सभी के जीवन से है ।अभिप्राय यह है कि अवसर की अपनी उपयोगिता है । सही समय, सही अवसर पर किया गया कार्य ही सफल होता है । उपादेय होता है । दूसरे संदर्भ से कहें तो व्यक्ति को अवसर बार बार नहीं मिलते । इसलिये जब अवसर नसीब हो तो उसका सदुपयोग कर लेना चाहिए । जीवन के कुछ काम उम्र के साथ होते हैं ।सही उम्र में जीवन के निर्धारित कार्य और उत्तरदायित्व पूरे कर लेना चाहिए ।
बुजुर्गों की कही गयी बातें और नसीहतें लोक में कहावतों के रूप में प्रवाहमान रहती हैं । हमें गंभीर शिक्षा देती हैं ।
- नरेन्द्र दुबे
✍️ लेखक के बारे में (About the Author)
मध्य प्रदेश निवासी नरेंद्र दुबे स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक़ हैं | 1982 सें स्वतंत्र पत्रकारिता | 1985 मे राष्ट्रीय दैनिक जनसत्ता (दिल्ली) से बतौर संवाददाता सम्बद्ध हुए | दो दशक तक जनसत्ता के लिए लेखन | देश की विभिन्न पत्र पत्रिकाओ मे रिपोर्ताज और फीचर प्रकाशित| विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय में अतिथि वक्ता बुंदेलखंड अंचल में सरकारी एवं गेर सरकारी स्तर पर सामाजिक कार्यों से प्रतिबद्धता पर्यावरण वाहिनी रोगी कल्याण समिति समिति हिंद मजदूर किसान पंचायत जल बिरादरी और पंचायत राज पदाधिकारी के प्रशिक्षण से सम्बद्धता | पिछले चार दशक से साहित्यिक संगठनों से सम्बद्धता कविता, लेख, निबंध एवं समीक्षा विधा मे सतत लेखन | हिंदुस्तानी साहित्य अकादमी द्वारा श्रेष्ठ समीक्षक़ का सम्मान संप्रति - स्वतंत्र लेखन एवं प्रबोधन